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क्या ओपी निकाल पाएंगे रायगढ़ विधानसभा सीट ? क्या कोलता समाज के दावेदारों में से किसी को नहीं मिलेगी टिकट ? विधानसभा क्षेत्र में सबसे ज्यादा वोटर्स कोलता समाज के नेताओं की क्या होगी रणनीति ? पढ़िए महुआ संवाद ….

क्या ओपी निकाल पाएंगे रायगढ़ विधानसभा सीट ? क्या कोलता समाज के दावेदारों को नहीं मिलेगी टिकट? विधानसभा क्षेत्र में सबसे ज्यादा वोटर्स वाले कोलता समाज के नेताओं की क्या होगी रणनीति ? पढ़िए महुआ संवाद …

रायगढ़। विधानसभा चुनाव ज्यों ज्यों सन्नीकट आते जा रही है अफवाहों और अनुमानों का दौर चल पड़ा है । अभी आचार संहिता लगने में महीने भर का समय है । भाजपा ने 21 विधानसभा सीटों पर अपनी प्रत्याशी घोषित कर दिए हैं। खरसिया सीट पर ओ पी चौधरी को नही लड़वाकर भाजपा ने एक जीती हुई सीट खो दी है । खरसिया ओपी का अपना चुनावी क्षेत्र है । जहा का वोटर्स उन्हे जान चुका है ,कहते है न की असफलता ही सफलता की कुंजी है ।पहली बार खरसिया से लड़कर ओपी ने कांग्रेस के उमेश पटेल की गिरेबान पर लगाम डाल दी थी । ओपी भले ही चुनाव हार गए लेकिन हार का अंतर पिछले चुनावों की अपेक्षा बहुत ही कम रहा ऐसे में दूसरी बार वे इस गड्ढे को आसानी से पाट सकते थे ।चुनाव लडना यहां उन्हे आसान ही नहीं,उनके कार्यकर्ताओ में उमंग भी रहती ।रहा सवाल रायगढ़ विधानसभा में टिकट दावेदारी और उन्हें भाजपा द्वारा प्रत्याशी बनाए जाने के जो अफवाह का दौर चला है ,अगर यह सच है तो रायगढ़ की जीती हुई भाजपा की सीट वह खोने जा रही है । ओपी की रायगढ़ विधानसभा क्षेत्र में अंतिम गांव। के लोग नहीं पहचानते और न ही भाजपा के बूथ लेबल के जमीनी कार्यकर्ता से उनकी परिचय है । अभी हाल ही में भाजपा किसान मोर्चा के बैनर तले बड़े स्तर पर कलेक्ट्रेट घेराव रखा गया था ,लेकिन कोई भीड़ नहीं जुट पाई ।भाजपा के ही इने गिने कार्यकर्ता थे ,ऐसा लग रहा था जैसे ओपी के नेतृत्व में की गई यह आंदोलन किसी जनाजे से कम थी । उस आंदोलन के असफलता की अगर समीक्षा की जाए तो ओपी को रायगढ़ से चुनाव लड़ने का मन अगर है तो समय रहते बदल लेनी चाहिए ।और यही सबसे बड़ी बुद्धिमानी होगी । चूंकि रायगढ़ की अग्रवाल लाबी उन्हे चुनाव जीतने नही देगी ।पार्टी में अंतर्कलह तो होगी ही चुनाव जैसे महत्वकांक्षी इरादे सामाजिक बंधुत्व के सागिर्द उन्हे हार की ओर ले जायेगी । रायगढ़ विधान सभा क्षेत्र में सबसे ज्यादा मतदाता कोलता समाज के लोगो की है उसके बाद मारवाड़ी व अघरिया समाज की है ।कोलता समाज ओड़िया संस्कृति के अनुयायी है ऐसे में ओड़िया समाज के वोटर्स की बात करे तो यह एक लाख चालीस हजार से ज्यादा मतदाता ओड़िया समुदाय से आते है जिनमे उत्कल ब्राम्हण समाज सहित ग्रामीण अंचल में निवासरत प्रायः सभी जातियों के लोग सम्मिलित है । अगर सिर्फ कोलता समाज की बात करे तो तीन दावेदार भाजपा से क्रमशः रत्थु गुप्ता ,विलिस गुप्ता और श्रीमती गोपिका गुप्ता की महती दावेदारी पार्टी में टिकट को लेकर है। आपको यह भी बता दें कि रायगढ़ विधान सभा क्षेत्र में 80% मतदाता और कार्यकर्ता भाजपा से किसी न किसी रूप में जुड़े हुए है । एक ऐसी राजनीतिक जन चेतना कोलता समाज के लोगो में आई थी कि सरिया विधान सभा चुनाव में भाजपा को तीसरे स्थान पर संतुष्ट होना पड़ा था और कोलता समाज के प्रत्याशी विराजेश्वर प्रधान 23 हजार से भी अधिक वोट हासिल कर दूसरे स्थान पर रहे । हालाकि कोलता समाज को वर्तमान में एकत्व में कमी बताई जाती है लेकिन अगर कोई चिंगारी इस समाज में आ जाय तो पर रायगढ़ की राजनीति में ऊंट किस करवट बैठेगा कहना मुस्किल होगा । अभी समाज में संगठनात्मक चुनाव चल रहा है। ग्रामीण व पल्ली सभा के साथ साथ आंचलिक सभा के चुनाव सम्पन्न हुए है ।जल्दी ही रायगढ़ संभागीय अध्यक्ष के लिए भी चुनाव होने है ऐसे में नए चुने हुए अध्यक्ष क्या निर्णय लेंगे ,यह तो आने वाला समय ही बताएगा ।